ईरान ने अमेरिका को इन चार जगहों पर दी बड़ी चोट, बहरीन-कुवैत-जॉर्डन में बरसाईं मिसाइलें, मध्य पूर्व में बढ़ा युद्ध का खतरा


ईरान ने अमेरिका को इन चार जगहों पर दी बड़ी चोट, बहरीन-कुवैत-जॉर्डन में बरसाईं मिसाइलें, मध्य पूर्व में बढ़ा युद्ध का खतरा

तेहरान/वॉशिंगटन: मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव अब एक नए और बेहद खतरनाक दौर में प्रवेश कर चुका है। अमेरिकी सैन्य हमलों के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों तथा उनसे जुड़े रणनीतिक लक्ष्यों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। कई देशों में एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय हो गए, सायरन बजने लगे और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की चेतावनी दी गई। इस घटनाक्रम ने पूरे खाड़ी क्षेत्र में युद्ध के और अधिक फैलने की आशंका बढ़ा दी है।

कैसे शुरू हुआ नया टकराव?

पिछले कुछ दिनों में अमेरिकी सेना ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों, मिसाइल लॉन्च साइटों और तटीय रक्षा प्रतिष्ठानों पर लगातार हमले किए। अमेरिका का कहना है कि इन अभियानों का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करना और होर्मुज जलडमरूमध्य में अंतरराष्ट्रीय जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। दूसरी ओर ईरान ने इसे अपनी संप्रभुता पर हमला बताते हुए कड़ा जवाब देने की चेतावनी दी थी।

ईरान की इस चेतावनी के कुछ ही समय बाद खाड़ी क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन हमलों की खबरें सामने आने लगीं। इन हमलों ने पूरे मध्य पूर्व को हाई अलर्ट पर ला दिया।

बहरीन बना पहला बड़ा निशाना

ईरान ने सबसे पहले बहरीन की ओर मिसाइलें और ड्रोन दागे। बहरीन में अमेरिकी नौसेना का महत्वपूर्ण सैन्य अड्डा मौजूद है, इसलिए इसे रणनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जाता है।

हमलों के बाद पूरे देश में चेतावनी सायरन बजाए गए और सुरक्षा एजेंसियों ने नागरिकों से घरों के अंदर रहने की अपील की। बहरीन की वायु रक्षा प्रणाली ने कई मिसाइलों और ड्रोन को हवा में ही नष्ट करने का दावा किया। हालांकि कुछ इलाकों में धमाकों की आवाजें सुनी गईं, जिससे लोगों में दहशत फैल गई।

कुवैत पर भी बरसाए मिसाइल और ड्रोन

ईरान ने इसके बाद कुवैत की ओर भी हमला किया। कुवैत के रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की कि उसकी एयर डिफेंस यूनिट्स ने कई "शत्रुतापूर्ण हवाई लक्ष्यों" को इंटरसेप्ट किया।

स्थानीय मीडिया के अनुसार एक औद्योगिक क्षेत्र में आग लग गई, जिसे बाद में दमकल विभाग ने काबू में कर लिया। अधिकारियों का कहना है कि नुकसान सीमित रहा और बड़े पैमाने पर जनहानि नहीं हुई। इस हमले के बाद पूरे कुवैत में सुरक्षा बढ़ा दी गई।

जॉर्डन के सैन्य ठिकानों पर हमला

ईरान की तीसरी बड़ी कार्रवाई जॉर्डन में देखने को मिली। यहां अमेरिकी सेना द्वारा उपयोग किए जाने वाले सैन्य ठिकानों की ओर मिसाइलें और ड्रोन दागे गए।

जॉर्डन की सेना ने दावा किया कि उसने कई मिसाइलों को रास्ते में ही मार गिराया। कुछ सैन्य इलाकों में धमाकों की खबरें भी सामने आईं। सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे देश में निगरानी और गश्त बढ़ा दी है।

चौथा मोर्चा: अमेरिकी सैन्य हितों को निशाना

ईरान ने केवल तीन देशों तक ही अपने हमले सीमित नहीं रखे। उसने खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य हितों और सहयोगी ठिकानों को भी निशाना बनाने की बात कही। ईरानी अधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका अपने हमले जारी रखता है तो जवाब और भी व्यापक होगा। कई रिपोर्टों में क्षेत्रीय अमेरिकी सैन्य सुविधाओं को निशाना बनाए जाने का उल्लेख किया गया है।

ईरान ने क्या कहा?

ईरान की सैन्य नेतृत्व ने कहा कि यह कार्रवाई अमेरिकी हमलों का सीधा जवाब है। उनका दावा है कि जब तक अमेरिका क्षेत्र में सैन्य कार्रवाई बंद नहीं करता, तब तक जवाबी अभियान जारी रहेगा।

ईरानी अधिकारियों ने यह भी कहा कि उनका उद्देश्य उन ठिकानों को निशाना बनाना है जहां से उनके खिलाफ सैन्य अभियान चलाए जा रहे हैं।

अमेरिका की प्रतिक्रिया

अमेरिकी रक्षा विभाग ने कहा कि ईरान के हमलों के बावजूद उसकी सैन्य क्षमता प्रभावित नहीं हुई है। अमेरिका ने स्पष्ट किया कि यदि उसके सैनिकों या सहयोगियों पर दोबारा हमला हुआ तो और अधिक कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी संकेत दिया कि अमेरिका अपने अभियान को रोकने के मूड में नहीं है और आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त सैन्य कार्रवाई की जा सकती है।

खाड़ी देशों में बढ़ी सुरक्षा

बहरीन, कुवैत और जॉर्डन सहित कई देशों ने अपने एयर डिफेंस सिस्टम पूरी तरह सक्रिय कर दिए हैं। हवाई अड्डों, सैन्य ठिकानों और तेल प्रतिष्ठानों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

कई देशों ने नागरिकों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है। अंतरराष्ट्रीय एयरलाइनों ने भी कुछ उड़ानों के मार्ग बदल दिए हैं।

तेल बाजार पर असर

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते संघर्ष का असर वैश्विक तेल बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। निवेशकों को आशंका है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव और बढ़ा तो दुनिया भर में कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष लंबा चला तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है।

संयुक्त राष्ट्र और विश्व समुदाय की चिंता

संयुक्त राष्ट्र सहित कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। यूरोप और खाड़ी देशों ने भी कहा है कि युद्ध का विस्तार पूरे क्षेत्र के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों पक्ष बातचीत की मेज पर नहीं लौटते तो यह संघर्ष कई अन्य देशों को भी अपनी चपेट में ले सकता है।

क्या हो सकता है आगे?

सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले कुछ दिन बेहद महत्वपूर्ण होंगे। यदि अमेरिका जवाबी हमला करता है तो ईरान भी अपनी सैन्य कार्रवाई और तेज कर सकता है। इससे पूरे मध्य पूर्व में अस्थिरता और बढ़ सकती है।

होर्मुज जलडमरूमध्य, तेल आपूर्ति, समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा इस समय सबसे बड़े चिंता के विषय बने हुए हैं। दुनिया की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या कूटनीतिक प्रयास इस संकट को रोक पाएंगे या फिर यह संघर्ष और बड़े युद्ध का रूप ले लेगा।

निष्कर्ष

ईरान द्वारा बहरीन, कुवैत और जॉर्डन सहित क्षेत्र में अमेरिकी हितों को निशाना बनाकर किए गए मिसाइल और ड्रोन हमले इस बात का संकेत हैं कि अमेरिका-ईरान संघर्ष अब केवल दो देशों तक सीमित नहीं रहा। इसका असर पूरे मध्य पूर्व की सुरक्षा, वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर पड़ रहा है। यदि जल्द कूटनीतिक समाधान नहीं निकला तो आने वाले दिनों में हालात और गंभीर हो सकते हैं। में बढ़ी सुरक्षा


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